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भिलाई: अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर, 300 से अधिक सुअरों की मौत, 150 को मारकर दफनाया गया…

भिलाई: अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर, 300 से अधिक सुअरों की मौत, 150 को मारकर दफनाया गया...

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भिलाई। भिलाई के जामुल क्षेत्र स्थित नारधा-मुड़पार में एक बड़े सुअर फार्म में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के कारण 300 से अधिक सुअरों की मौत हो गई है। संक्रमण फैलने से रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने बचे हुए करीब 150 सुअरों को इंजेक्शन देकर मारकर दफना दिया।

तेजी से फैला संक्रमण, कई दिनों में हुई भारी मौतें

जानकारी के अनुसार, फार्म में कुल 300 से 400 सुअर थे। 29 मार्च को पहली बार सैंपल लिया गया, जिसके बाद 1 अप्रैल से सुअरों की मौत शुरू हो गई।

6 अप्रैल तक करीब 300 सुअरों की मौत हो चुकी थी, जिसके बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बाकी सुअरों को भी मारने का निर्णय लिया।

भिलाई: अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर, 300 से अधिक सुअरों की मौत, 150 को मारकर दफनाया गया...
भिलाई: अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर, 300 से अधिक सुअरों की मौत, 150 को मारकर दफनाया गया…

पशुपालन विभाग की टीम ने की जांच

सूचना मिलने पर पशुपालन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों और डॉक्टरों ने PPE किट पहनकर फार्म का निरीक्षण किया और सैंपल जांच के लिए भेजे।

वसीम शम्स ने बताया कि सैंपल को भोपाल की एनिमल डिजीज लैब भेजा गया था, जहां रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

संक्रमण रोकने के लिए सख्त कदम

संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए:

  • संक्रमित और संदिग्ध सुअरों को मारकर दफनाया गया
  • पूरे फार्म को सील करने की प्रक्रिया शुरू की गई
  • आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई

फार्म मालिक को भारी नुकसान

फार्म संचालक पीओ जॉय के अनुसार, एक सुअर की कीमत लगभग 30 हजार रुपये है। इस हिसाब से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

उन्होंने बताया कि फार्म में 133 गर्भवती सुअर और करीब 400 बच्चे भी थे, जिससे नुकसान और बढ़ गया है।

“समय पर कार्रवाई होती तो नुकसान कम होता”

फार्म मालिक ने कहा कि गंभीर बीमारी की सूचना मिलने के बाद प्रशासन को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

उन्होंने चिंता जताई कि यदि समय रहते कदम उठाए जाते, तो संक्रमण को अन्य फार्म तक फैलने से रोका जा सकता था और नुकसान कम होता।

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इंसानों में नहीं फैलता संक्रमण

विशेषज्ञों के अनुसार, अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसका अभी तक कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है।

हालांकि, यह बीमारी केवल सुअरों में फैलती है और इंसानों या अन्य जानवरों को प्रभावित नहीं करती।

बढ़ सकता है खतरा, सतर्क रहने की जरूरत

विशेषज्ञों ने बताया कि यह वायरस कुछ समय तक वस्तुओं और सतहों पर भी जीवित रह सकता है।

इसलिए सुअर पालन से जुड़े लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

भिलाई के इस बड़े सुअर फार्म में हुई घटना ने पशुपालन क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम संक्रमण रोकने के लिए जरूरी हैं, लेकिन भविष्य में ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और सतर्कता बेहद आवश्यक होगी।

भिलाई में बड़ा खतरा

अफ्रीकन स्वाइन फीवर के कारण 300 से ज्यादा सुअरों की मौत हो गई। संक्रमण रोकने के लिए 150 सुअरों को मारकर दफनाया गया।

भिलाई में प्रशासन अलर्ट

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